ईरान में सत्ता की असली चाबी किसके पास है

ईरान में सत्ता की असली चाबी किसके पास है

ईरान की गलियों से लेकर तेहरान के सत्ता के गलियारों तक आज एक ही सवाल गूंज रहा है। क्या सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अभी भी नियंत्रण में हैं? जब देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति की सेहत को लेकर अफवाहें उड़ती हैं, तो पूरी दुनिया की नजरें उस खाली जगह पर टिक जाती हैं जिसे भरने के लिए होड़ मची है। सच तो ये है कि ईरान में सत्ता का संतुलन बदल चुका है। ये अब केवल धर्मगुरुओं का देश नहीं रहा।

ईरान की राजनीति को समझने के लिए आपको इसकी परतों को छीलना होगा। वहां एक तरफ धार्मिक नेतृत्व है और दूसरी तरफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की फौलादी ताकत। लोग अक्सर सोचते हैं कि सुप्रीम लीडर ही सब कुछ तय करते हैं। लेकिन हकीकत में IRGC ने देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी नीति और अब सत्ता के उत्तराधिकार पर अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली है कि बिना उनकी मर्जी के पत्ता भी नहीं हिलता।

क्या वाकई गायब हैं सुप्रीम लीडर

खामेनेई की उम्र 85 पार कर चुकी है। उनकी सेहत को लेकर दशकों से अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन हाल के महीनों में ये चर्चाएं तेज हो गई हैं। जब भी वो सार्वजनिक मंचों से कुछ समय के लिए दूर होते हैं, तो इजरायली मीडिया और पश्चिमी इंटेलिजेंस एजेंसियां सक्रिय हो जाती हैं। लेकिन गायब होने का मतलब ये नहीं कि वो सत्ता छोड़ चुके हैं। ईरान में 'गायब' होना अक्सर एक राजनीतिक चाल भी होती है।

अयातुल्ला खामेनेई का उत्तराधिकार ईरान के भविष्य की सबसे बड़ी पहेली है। उनका बेटा मोजतबा खामेनेई इस दौड़ में सबसे आगे बताया जाता है। मोजतबा की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाइए कि वो पर्दे के पीछे से पूरी खुफिया मशीनरी को नियंत्रित करते हैं। लेकिन क्या ईरान के लोग एक और वंशवादी शासन को स्वीकार करेंगे? 1979 की क्रांति तो राजशाही को खत्म करने के लिए हुई थी। अगर मोजतबा को गद्दी मिलती है, तो ये उस क्रांति के मूल सिद्धांतों के साथ एक बड़ा मजाक होगा।

IRGC और पर्दे के पीछे का खेल

अगर आप ईरान को सिर्फ एक धर्मशासित देश मानते हैं, तो आप गलती कर रहे हैं। ईरान अब एक सैन्य-प्रशासित राज्य बनने की ओर बढ़ चुका है। IRGC अब सिर्फ एक सेना नहीं है। ये एक बहुत बड़ा बिजनेस एंपायर है। कंस्ट्रक्शन से लेकर तेल और गैस तक, हर जगह इनका पैसा लगा है। इनके पास अपनी अलग इंटेलिजेंस यूनिट है और ये सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करते हैं।

सत्ता का असली संघर्ष यहीं शुरू होता है। IRGC को एक ऐसे उत्तराधिकारी की तलाश है जो उनके हितों की रक्षा कर सके। उन्हें कोई ऐसा कट्टरपंथी नहीं चाहिए जो सिर्फ धर्म की बात करे, बल्कि ऐसा चेहरा चाहिए जो उनके आर्थिक साम्राज्य को आंच न आने दे। इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत ने इस पूरे समीकरण को उलझा दिया है। रईसी को खामेनेई का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जाता था। उनकी मौत के बाद अब मैदान पूरी तरह से खुला है और IRGC इसे अपने पक्ष में मोड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी।

आम जनता और बढ़ता असंतोष

तेहरान की सड़कों पर घूमते हुए आपको वो तनाव महसूस होगा जो खबरों में नहीं दिखता। महंगाई आसमान छू रही है। रियाल (ईरानी मुद्रा) की कीमत मिट्टी में मिल चुकी है। युवा बेरोजगार हैं और इंटरनेट पर पाबंदियां बढ़ती जा रही हैं। 'महिला, जीवन, आजादी' आंदोलन ने ये साफ कर दिया कि नई पीढ़ी अब पुरानी कट्टरपंथी सोच से ऊब चुकी है।

ईरान का मध्यम वर्ग अब इस बात की परवाह नहीं करता कि अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा। उन्हें परवाह है अपनी जेब की और अपनी आजादी की। जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग आपस में लड़ रहे होते हैं, तो जमीन पर गुस्सा और बढ़ता है। सत्ता के इस वैक्यूम का फायदा उठाकर अगर IRGC पूरी तरह से कमान संभालती है, तो ईरान में नागरिक अधिकारों का जो थोड़ा-बहुत हिस्सा बचा है, वो भी खत्म हो जाएगा।

इजरायल और पश्चिम का डर

ईरान के भीतर की ये हलचल सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। मिडिल ईस्ट का पूरा नक्शा इस पर टिका है। अगर IRGC का वर्चस्व और बढ़ता है, तो क्षेत्रीय संघर्ष और तेज होगा। हिजबुल्लाह, हमास और हूतियों को मिलने वाली मदद सीधे तौर पर IRGC के फंड से आती है। अमेरिका और इजरायल को डर है कि नेतृत्व बदलने के दौरान ईरान परमाणु हथियारों की दिशा में अपनी रफ्तार और तेज कर सकता है।

ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं अब केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं रही हैं। ये सत्ता बचाने का एक औजार बन गई हैं। खामेनेई के बाद आने वाला कोई भी नेता अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए राष्ट्रवाद और परमाणु ताकत का सहारा लेगा। ये एक खतरनाक खेल है जिसमें हारने वाला कोई भी हो, कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ेगी।

सत्ता के उत्तराधिकार की कानूनी प्रक्रिया

ईरान के संविधान के मुताबिक, 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है। इस असेंबली में 88 धर्मगुरु होते हैं। लेकिन ये सिर्फ कागजी बात है। असल में ये असेंबली खुद उन्हीं लोगों से भरी हुई है जिन्हें खामेनेई और सुरक्षा एजेंसियां पसंद करती हैं। मोजतबा खामेनेई का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इस असेंबली के भीतर अपनी पैठ बहुत मजबूत कर ली है।

ईरान के भविष्य को लेकर तीन संभावनाएं दिखती हैं। पहली, मोजतबा खामेनेई का अभिषेक। दूसरी, एक काउंसिल का गठन जो सामूहिक रूप से फैसले ले। तीसरी, IRGC द्वारा सीधा तख्तापलट या पर्दे के पीछे से पूर्ण नियंत्रण। इनमें से जो भी होगा, वो ईरान को एक नई दिशा में ले जाएगा, जो शायद और भी ज्यादा टकराव वाली होगी।

ईरान में कौन राज कर रहा है, इसका जवाब किसी एक नाम में नहीं छिपा। ये एक जटिल गठजोड़ है जिसमें बंदूक और कुरान दोनों का इस्तेमाल हो रहा है। अगर आप ईरान की स्थिति पर नजर रखना चाहते हैं, तो सुप्रीम लीडर की तस्वीरों से ज्यादा IRGC के जनरल के बयानों और देश की मुद्रा दर पर ध्यान दें।

अगले कुछ महीने ईरान के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं। अपनी सुरक्षा और निवेश की योजना बनाने वाले वैश्विक खिलाड़ी अब 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपना रहे हैं। ईरान का अगला कदम केवल एक देश का भाग्य नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और सुरक्षा ढांचे को बदल सकता है। इस बदलाव के लिए तैयार रहना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

VJ

Victoria Jackson

Victoria Jackson is a prolific writer and researcher with expertise in digital media, emerging technologies, and social trends shaping the modern world.