लेबनान की सीमा पर तनाव अब उस मोड़ पर आ गया है जहाँ हर बीतता घंटा एक बड़ी जंग की आहट दे रहा है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव के बीच हिज्बुल्लाह ने एक ऐसा दावा किया है जिसने मिडिल ईस्ट की मिलिट्री पावर डायनामिक्स पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हिज्बुल्लाह का कहना है कि उसने लेबनानी हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे एक इजराइली लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह कोई मामूली खबर नहीं है। अगर इसमें रत्ती भर भी सच्चाई है, तो इसका मतलब है कि इजराइल का 'हवाई दबदबा' अब खतरे में है।
लेकिन क्या वाकई हिज्बुल्लाह के पास इतनी ताकत है कि वो दुनिया के सबसे एडवांस डिफेंस सिस्टम वाले विमानों को धूल चटा सके? सच थोड़ा पेचीदा है।
हिज्बुल्लाह का दावा और जमीनी हकीकत
हिज्बुल्लाह ने हाल ही में बयान जारी कर कहा कि उनके लड़ाकू दस्ते ने इजराइली युद्धक विमान को निशाना बनाया और उसे पीछे हटने या क्रैश होने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने सरफेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) का इस्तेमाल करने की बात कही है। इजराइल की वायुसेना, जो दुनिया में अपनी सटीक मारक क्षमता के लिए जानी जाती है, उसके लिए ये एक बड़ा झटका हो सकता है।
अक्सर हम खबरों में देखते हैं कि इजराइल लेबनान में घुसकर हमले करता है। लेकिन इस बार कहानी बदली हुई लग रही है। हिज्बुल्लाह अब केवल रॉकेट दागने तक सीमित नहीं रहा। उसने अपने हथियारों के जखीरे में ईरान से मिली नई तकनीक शामिल कर ली है। इसमें खोरदाद-15 जैसे डिफेंस सिस्टम और खतरनाक ड्रोन शामिल हैं। ये हथियार इजराइल के F-15 और F-16 जैसे विमानों के लिए काल बन सकते हैं।
ईरान इस पूरी बिसात का असली खिलाड़ी है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि अगर इजराइल ने उसकी सीमा लांघी, तो हिज्बुल्लाह चुप नहीं बैठेगा। हिज्बुल्लाह सिर्फ एक आतंकी संगठन नहीं बल्कि एक मिनी-आर्मी की तरह काम कर रहा है। उनके पास अब ऐसी मिसाइलें हैं जो लेबनान की पहाड़ियों से सीधे तेल अवीव को निशाना बना सकती हैं।
इजराइली वायुसेना की अभेद्य दीवार में दरार
इजराइल हमेशा से दावा करता आया है कि उसका एयर डिफेंस और उसके पायलट सबसे बेहतरीन हैं। लेकिन हाल के महीनों में हिज्बुल्लाह ने कई इजराइली ड्रोन्स को मार गिराया है। 'हर्मिस 450' और 'हर्मिस 900' जैसे महंगे और एडवांस ड्रोन्स का गिरना यह संकेत है कि इजराइल का रडार सिस्टम अब हिज्बुल्लाह की नई मिसाइलों को ट्रैक करने में चूक रहा है।
जब बात लड़ाकू विमानों की आती है, तो रिस्क बहुत बढ़ जाता है। एक पायलट की जान और करोड़ों डॉलर का विमान खोना इजराइल के लिए राजनीतिक रूप से आत्महत्या जैसा होगा। बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर पहले से ही दबाव है। अगर हिज्बुल्लाह वाकई किसी फाइटर जेट को गिराने के सबूत पेश कर देता है, तो इजराइल को अपनी रणनीति पूरी तरह बदलनी पड़ेगी।
ईरान का हाथ और नई मिसाइल तकनीक
ईरान ने हिज्बुल्लाह को केवल हथियार नहीं दिए, बल्कि उन्हें बनाने की तकनीक भी दे दी है। दक्षिणी लेबनान की सुरंगों में अब ऐसी मिसाइलें तैयार हो रही हैं जो रडार की पकड़ में नहीं आतीं।
- गाइडेंस सिस्टम: ये मिसाइलें अब जीपीएस गाइडेड हैं।
- रेंज: इनकी पहुंच अब पूरे इजराइल में है।
- स्पीड: हाइपरसोनिक तो नहीं, लेकिन इतनी तेज जरूर हैं कि आयरन डोम को चकमा दे सकें।
हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह ने कई बार कहा है कि उनके पास 'सरप्राइज' तैयार हैं। ये विमान गिराने का दावा उसी सरप्राइज का हिस्सा हो सकता है। ईरान ने हाल ही में इजराइल पर जो मिसाइल हमला किया था, उसने इजराइल के डिफेंस सिस्टम की पोल खोल दी थी। कई मिसाइलें एयरबेस तक जा पहुंची थीं। इससे हिज्बुल्लाह का हौसला बढ़ा है। उन्हें लगता है कि अगर ईरान सीधे हमला कर सकता है, तो वो लेबनान की सीमा से इजराइल को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लेबनान की जनता और युद्ध का खौफ
लेबनान की हालत पहले से ही खराब है। आर्थिक तंगी और राजनीतिक अस्थिरता ने देश को तोड़ दिया है। ऐसे में इजराइल के साथ पूर्ण युद्ध लेबनान को दशकों पीछे धकेल देगा। लेकिन हिज्बुल्लाह को इससे फर्क नहीं पड़ता। उनका एजेंडा लेबनान से ज्यादा ईरान के हितों की रक्षा करना है।
इजराइल ने भी चेतावनी दी है कि अगर हिज्बुल्लाह ने सीमा लांघी, तो बेरूत का हाल भी गाजा जैसा कर दिया जाएगा। ये कोई कोरी धमकी नहीं है। इजराइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने उत्तरी सीमा पर हजारों सैनिकों को तैनात कर दिया है। टैंकों की गड़गड़ाहट अब आम हो चुकी है।
हिज्बुल्लाह का यह दावा कि उसने विमान गिराया है, दरअसल एक साइकोलॉजिकल वॉरफेयर का हिस्सा भी हो सकता है। युद्ध में सूचना उतनी ही बड़ी ताकत होती है जितनी कि मिसाइल। इजराइली जनता के बीच डर पैदा करना और अपनी ताकत का प्रदर्शन करना हिज्बुल्लाह की पुरानी रणनीति रही है।
सैन्य संतुलन और ग्लोबल पावर का दखल
अमेरिका इस पूरे मामले में इजराइल के पीछे खड़ा है। लेकिन बाइडेन प्रशासन को डर है कि अगर जंग लेबनान तक फैली, तो अमेरिका को भी सीधे तौर पर कूदना पड़ेगा। रूस और चीन भी इस क्षेत्र पर नजरें गड़ाए बैठे हैं। ईरान को रूस से मिल रही आधुनिक रडार तकनीक हिज्बुल्लाह के हाथ लग सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो इजराइल के लिए हवाई हमले करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
हकीकत तो ये है कि अब कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। इजराइल को लगता है कि हिज्बुल्लाह को अभी नहीं कुचला तो भविष्य में वो और भी घातक हो जाएगा। वहीं हिज्बुल्लाह को लगता है कि ये इजराइल को कमजोर करने का सबसे सही समय है।
हिज्बुल्लाह के पास आज जो ताकत है, वो 2006 के युद्ध के मुकाबले दस गुना ज्यादा है। उनके पास अब सटीक मार करने वाले रॉकेट्स का ऐसा भंडार है जो इजराइल के पावर ग्रिड्स, एयरपोर्ट्स और मिलिट्री हेडक्वार्टर को तबाह कर सकता है। विमान गिराने का दावा इसी ताकत की एक छोटी सी झलक है।
आगे क्या होने वाला है
आने वाले दिनों में हमें बॉर्डर पर और भी ज्यादा झड़पें देखने को मिलेंगी। अगर इजराइल ने अपने विमान खोने शुरू किए, तो वो भारी बमबारी से इसका जवाब देगा। यह एक खतरनाक चक्र है जो किसी को नहीं बख्शेगा। मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद फिलहाल धुंधली है।
आपको इस स्थिति पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि ये केवल दो देशों की जंग नहीं है। ये ग्लोबल इकोनॉमी और एनर्जी सप्लाई को भी प्रभावित करेगा। अगर आप इस क्षेत्र के घटनाक्रमों को समझना चाहते हैं, तो केवल दावों पर नहीं, बल्कि ग्राउंड मूवमेंट पर ध्यान दें। इजराइली वायुसेना की अगली कार्रवाई बताएगी कि हिज्बुल्लाह के दावे में कितना दम था।
अगला कदम अब इजराइल का होगा। क्या वो हवाई हमले बढ़ाएगा या जमीनी हमले की शुरुआत करेगा? ये देखने वाली बात होगी। फिलहाल, लेबनान की सीमा पर बारूद की गंध बढ़ती जा रही है और शांति की गुंजाइश खत्म होती दिख रही है।